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फाइलेरिया के उपचार के लिठयहां हम आपको कà¥à¤› घरेलू और आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• नà¥à¤¸à¥à¤–े बता रहे हैं:-
लौंग - लौंग फाइलेरिया के उपचार के लिठबहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ घरेलू नà¥à¤¸à¥à¤–ा है। लौंग में मौजूद à¤à¤‚जाइम परजीवी के पनपते ही उसे खतà¥à¤® कर देते हैं और बहà¥à¤¤ ही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ तरीके से परजीवी को रकà¥à¤¤ से नषà¥à¤Ÿ कर देते हैं। रोगी लौंग से तैयार चाय का सेवन कर सकते हैं।
काले अखरोट का तेल - काले अखरोट के तेल को à¤à¤• कप गरà¥à¤® पानी में तीन से चार बूंदे डालकर पिà¤à¤‚। इस मितà¥à¤°à¤£ को दिन में दो बार पिया जा सकता है। अखरोट के अंदर मौजूद गà¥à¤£à¥‹à¤‚ से खून में मौजूद कीड़ों की संखà¥à¤¯à¤¾ कम होने लगती है और धीरे धीरे à¤à¤•दम खतà¥à¤® हो जाती है। जलà¥à¤¦ परिणाम के लिठकम से कम छह हफà¥à¤¤à¥‡ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ इस उपाय को करें।
खाने में à¤à¤¸à¥‡ करें यूज - फाइलेरिया के इलाज के लिठअपने रोज के खाने में कà¥à¤› आहार जैसे लहसà¥à¤¨, अनानास, मीठे आलू, शकरकंदी, गाजर और खà¥à¤¬à¤¾à¤¨à¥€ आदि शामिल करें। इनमें विटामिन ठहोता है और बैकà¥à¤Ÿà¤°à¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ को मारने के लिठविशेष गà¥à¤£ à¤à¥€ होते हैं।
आंवला- आंवला में विटामिन सी पà¥à¤°à¤šà¥à¤° मातà¥à¤°à¤¾ में होता है। इसमें à¤à¤¨à¥à¤¥à¥‡à¤²à¤®à¤¿à¤‚थिंक (Anthelmintic) à¤à¥€ होता है जो कि घाव को जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¨à¥‡ में बेहद लाà¤à¤ªà¥à¤°à¤¦ है। आंवला को रोज खाने से इंफेकà¥à¤¶à¤¨ दूर रहता है।
अशà¥à¤µà¤—ंधा - अशà¥à¤µà¤—ंधा शिलाजीत का मà¥à¤–à¥à¤¯ हिसà¥à¤¸à¤¾ है, जिसके आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ में बहà¥à¤¤ से उपयोग हैं। अशà¥à¤µà¤—ंधा को फाइलेरिया के इलाज के लिठà¤à¥€ इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है।
बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¥€- बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ समय से ही बहà¥à¤¤ सी बीमारियों के इलाज के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² की जाती है। फाइलेरिया के इलाज के लिठबà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¥€ को पीसकर उसका लेप लगाया जाता है। रोजाना à¤à¤¸à¤¾ करने से रोगी सूजन कम हो जाती है।
अदरक- फाइलेरिया से निजात के लिठसूखे अदरक का पाउडर या सोंठका रोज गरम पानी से सेवन करें। इसके सेवन से शरीर में मौजूद परजीवी नषà¥à¤Ÿ होते हैं और मरीज को जलà¥à¤¦à¥€ ठीक होने में मदद मिलती है।
शंखपà¥à¤·à¥à¤ªà¥€- फाइलेरिया के उपचार के लिठशंखपà¥à¤·à¥à¤ªà¥€ की जड़ को गरम पानी के साथ पीसकर पेसà¥à¤Ÿ तैयार करें। इस पेसà¥à¤Ÿ को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर लगाà¤à¤‚। इससे सूजन कम होने में मदद मिलेगी।
कà¥à¤²à¥à¤ ी- कà¥à¤²à¥à¤ ी या हॉरà¥à¤¸ गà¥à¤°à¤¾à¤® में चींटियों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ निकाली गई मिटà¥à¤Ÿà¥€ और अंडे की सफेदी मिलाकर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर लगाà¤à¤‚। इस लेप को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर लगाà¤à¤‚, सूजन से आराम मिलेगा।अगर को पानी के साथ मिलाकर लेप तैयार करें। इस लेप को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ 20 मिनट के लिठदिन में दो बार पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर लगाà¤à¤‚। इससे घाव जलà¥à¤¦à¥€ à¤à¤°à¤¤à¥‡ हैं और सूजन कम होती है। घाव में मौजूद बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ मर जाते हैं।
रॉक सालà¥à¤Ÿ - शंखपà¥à¤·à¥à¤ªà¥€ और सौंठके पाउडर में रॉक सालà¥à¤Ÿ मिलाकर, à¤à¤• à¤à¤• चà¥à¤Ÿà¤•ी रोज दो बार गरम पानी के साथ लें।
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